ईडब्ल्यूएस कोटा मामला: ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ सवर्णा धाती... | सुप्रीम कोर्ट | यूवीइंडिया | *समाचार

Nov 08, 2022
Source: uvindianews.com

साल 2019 के लोक सभा चुनाव के कुछ महीने पहले जब जनवरी में मोदी सरकार ने सवर्णों में आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का विधेयक संसद से पारित कराया था। तो उसी वक्त यह तय हो गया था, कि मोदी सरकार ने बड़ा दांव चल दिया है, जिस पर राजनीति दलों से लेकर कानूनविद सवाल उठाएंगे। अब करीब 46 महीने बाद उसकी संवैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट ने 3-2 के फैसले के साथ मुहर लगा दी है।
5 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ में से 3 ने EWS आरक्षण के सरकार के फैसले को संवैधानिक ढांचे का उल्लंघन नहीं माना है। यानी देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण नौकरी और शिक्षा क्षेत्र में जारी रहेगा। ऐसे में इस फैसले से किसे फायदा मिलेगा और कौन उसके लिए पात्र है, यह पहला सवाल है। दूसरा सवाल है कि इस फैसले से मेरिट सिस्टम में क्या बदलाव आएगा और जनरल कैटेगरी की कट ऑफ लिस्ट पर किस तरह का असर होगा। तीसरा सबसे अहम सवाल है कि इस फैसले का भारत की आरक्षण राजनीति पर क्या असर होगा? चूंकि यह आरक्षण जाति के आधार पर नहीं है। ऐसे में EWS कोटा के तहत 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान सभी धर्मों के गरीब तबके को मिलेगा। इसमें हिंदू के अलावा मुस्लिम, ईसाई, सिख आदि भी शामिल होंगे। आरक्षण का पैमाना सामान्य वर्ग के परिवार की आय से तय होगा। इसमें ऐसे परिवार जिनकी सालाना आय 8 लाख लाख रुपये से कम है, उन्हें 10 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसमें वेतन, कृषि, व्यवसाय, पेशे आदि से हुई आय को शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा EWS के तहत आरक्षण का लाभ लेने के लिए, परिवार के पास 5 एकड़ या उससे अधिक साइज की कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए। इसी तरह परिवार के पास 1000 वर्ग फुट या उससे अधिक के आवासीय फ्लैट का मालिकाना हक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा किसी म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में 100 गज से ज्यादा जमीन नहीं होनी चाहिए। जबकि गैर म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में 200 गज से ज्यादा जमीन नहीं होनी चाहिए। सरकार ने 124 वें संविधान संशोधन के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू किया था। इस फैसले का मतलब यह है कि देश में अब जनरल कैटेगरी के तहत 10 फीसदी हिस्सा आरक्षण के तहत इस्तेमाल होगा। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी कैटेगरी के लोग नहीं शामिल होंगे। इसके पीछे तर्क यह है कि उन्हें पहले से ही आरक्षण प्राप्त है। यानी EWS कोटा बचे 50 फीसदी में लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब बिना आरक्षण वाली कैटेगरी के लिए 40 फीसदी ही स्थान उपलब्ध होगा। क्योंकि अब 10 फीसदी EWS कोटे के लिए जनरल कैटेगरी का एक बड़ा वर्ग आवेदन करेगा। इसका असर कट ऑफ, ऊंची होने के रूप में दिख सकता है।
पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद की मई 2022 में आई रिपोर्ट के अनुसार देश में जिन लोगों की सालाना वेतन 3 लाख रुपये हैं, वह देश के टॉप-10 आय वाले वर्ग में आते हैं। इसके आधार पर सामान्य वर्ग की एक बड़ी आबादी आरक्षण के दायरे में आ जाएगी।
भाजपा को राजनीतिक फायदा !
साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से भाजपा को सवर्णों के अंदर एक बड़े वर्ग की तरफ से आरक्षण की मांग का सामना करना पड़ा है। इसमें कई राज्यों में जाट आंदोलन, मराठा आंदोलन सत्ताधारी दल और सरकार के लिए चुनौती बने थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद वह ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ सहित दूसरे सवर्ण जातियों का साथ मजबूती से बनाई रख सकेगी। इसके अलावा 2024 के लोक सभा चुनाव को देखते हुए भाजपा खास तौर से गरीब मुस्लिम तबके को अपने साथ जोड़ना चाह रही है। ऐसे में EWS कोटे के तहत 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण का दांव, उसके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले यह तो साफ हो गया है कि 50 फीसदी कोटे बाहर 10 फीसदी आरक्षण देना संविधान की मूल भावना का उल्लंघन नहीं है। लेकिन EWS कोट के तहत केवल सवर्ण वर्ग और दूसरे धर्मों के लोगों को ही लाभ मिलेगा। इसे देखते हुए, SC,ST, OBC वर्ग की तरफ से इस बात की मांग उठ सकती है कि उनके समुदाय को आर्थिक आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए। और इसके लिए उन्हें विपक्ष का साथ मिल सकता है। आरक्षण से पहले से जारी व्यवस्था पर असर नहीं हो, इसलिए साल 2019 में कानून आने के बाद सरकार ने कहा था कि देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 10 फीसदी सीटें बढ़ाई जाएगी, जिससे नई व्यवस्था का मौजूदा सीटों पर असर नहीं पड़े। हालांकि इसके लिए सरकार को बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के साथ-साथ शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ानी होगी। 

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