भारत को लिथियम, तांबा, तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ाने को तैयार अर्जेंटीना, रणनीतिक साझेदारी को मिल सकती है नई गति

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को देखते हुए अर्जेंटीना ने स्वयं को एक भरोसेमंद दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता के रूप में पेश किया है। अर्जेंटीना भारत को लिथियम, तांबा, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराने के लिए तैयार है, ताकि भारत अपनी महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा आपूर्ति को विविध बना सके और सीमित वैश्विक स्रोतों पर निर्भरता कम कर सके।

 

अर्जेंटीना, बोलीविया और चिली के साथ तथाकथित ‘लिथियम ट्रायंगल’ का हिस्सा है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े लिथियम भंडारों में शामिल माना जाता है और इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण तथा ऊर्जा संक्रमण से जुड़े उद्योगों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत जिस तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसके लिए लिथियम और तांबे जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और विविध आपूर्ति आवश्यक होती जा रही है। इसी कारण अर्जेंटीना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार के रूप में उभर सकता है।

 

भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए नया भरोसेमंद स्रोत
अर्जेंटीना के भारत में राजदूत मारियानो अगस्टिन काउचिनो के अनुसार, भारत के ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के साथ देश को सुरक्षित, विविध और दीर्घकालिक ऊर्जा एवं खनिज आपूर्ति की आवश्यकता होगी।
उन्होंने संकेत दिया कि अर्जेंटीना भारत को लिथियम और तांबे के साथ-साथ तेल एवं गैस की बढ़ती मात्रा उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। अर्जेंटीना की भौगोलिक दूरी के बावजूद उसे वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों से अपेक्षाकृत दूर एक स्थिर आपूर्ति भागीदार के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति को अधिक संतुलित बनाना चाहता है।

 

अर्जेंटीना से भारत का कच्चे तेल आयात तेजी से बढ़ा
भारत द्वारा अर्जेंटीना से कच्चे तेल का आयात उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में अर्जेंटीना से भारत का कच्चे तेल आयात लगभग 110 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 92 प्रतिशत अधिक था।
यह वृद्धि दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार में बढ़ती संभावनाओं को दर्शाती है। यदि भारत अर्जेंटीना के तेल और गैस संसाधनों का अधिक उपयोग करता है, तो इससे ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों का विविधीकरण और मजबूत हो सकता है।

 

चीन पर निर्भरता कम करने में मददगार हो सकता है अर्जेंटीना
भारत महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में अत्यधिक निर्भरता से बचना चाहता है। विशेष रूप से लिथियम से जुड़ी वैश्विक प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग क्षमता का बड़ा हिस्सा चीन के पास केंद्रित है।
भारत की रणनीति ऐसे वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की है जहां से महत्वपूर्ण खनिजों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। अर्जेंटीना इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अर्जेंटीना भी अपने संसाधनों के लिए अधिक विविध वैश्विक बाजार विकसित करना चाहता है। इससे दोनों देशों के हित एक-दूसरे के पूरक बनते दिखाई देते हैं।

 

द्विपक्षीय व्यापार में तेज वृद्धि
भारत और अर्जेंटीना के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 5.96 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भारत अर्जेंटीना के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच व्यापार अब कृषि उत्पादों से आगे बढ़कर ऊर्जा, खनिज, तकनीक और औद्योगिक सहयोग की दिशा में विस्तार कर रहा है।
अर्जेंटीना जहां खाद्य पदार्थ, ऊर्जा और खनिज संसाधन उपलब्ध करा सकता है, वहीं भारत उसके लिए एक विशाल और तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है।

 

लिथियम कारोबार में भारत की मौजूदगी बढ़ी
भारत अर्जेंटीना के लिथियम क्षेत्र में अपनी उपस्थिति पहले ही दर्ज कर चुका है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी KABIL ने अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत में लिथियम परियोजनाओं से जुड़े समझौते किए हैं।
यह कदम भारत की विदेशों में महत्वपूर्ण खनिज स्रोतों को सुरक्षित करने की रणनीति का हिस्सा है। भारत केवल तैयार खनिज खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि खनन परियोजनाओं में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते भी विकसित कर रहा है।
ऐसी परियोजनाएं भविष्य में भारत के बैटरी उद्योग और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

 

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए लिथियम सबसे अहम
भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और उपयोग को तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विस्तार के लिए बैटरी निर्माण क्षमता विकसित करना आवश्यक है और बैटरी निर्माण के लिए लिथियम एक प्रमुख कच्चा माल है।
अर्जेंटीना के उत्तरी क्षेत्रों में लिथियम के विशाल भंडार मौजूद हैं। ऐसे में भारत और अर्जेंटीना के बीच लिथियम साझेदारी भारत के ईवी इकोसिस्टम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भविष्य में यदि भारत घरेलू स्तर पर बैटरी सेल निर्माण का बड़े पैमाने पर विस्तार करता है, तो लिथियम की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। इसलिए अभी से भरोसेमंद स्रोतों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी बनाना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

तांबे की बढ़ती मांग भी बनेगी सहयोग का आधार
ऊर्जा परिवर्तन में केवल लिथियम ही नहीं बल्कि तांबे की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रिक वाहन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र, बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में तांबे की मांग लगातार बढ़ रही है।
अर्जेंटीना के पास तांबे के भी महत्वपूर्ण भंडार हैं। इसलिए भारत-अर्जेंटीना सहयोग भविष्य में लिथियम से आगे बढ़कर तांबा खनन और आपूर्ति तक विस्तारित हो सकता है।

 

खनन से लेकर रिफाइनिंग तक साझेदारी की संभावना
दोनों देशों के बीच सहयोग केवल कच्चे खनिजों की खरीद तक सीमित रहने की आवश्यकता नहीं है। खनन, प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग, बैटरी सामग्री निर्माण और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी विकसित की जा सकती है।
भारत महत्वपूर्ण खनिजों की पूरी वैल्यू चेन में अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यदि अर्जेंटीना के प्राकृतिक संसाधनों को भारत की औद्योगिक और विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़ा जाता है, तो दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं।

 

रणनीतिक खनिज साझेदारी बन सकती है द्विपक्षीय रिश्तों का नया आधार
भारत और अर्जेंटीना के संबंध अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर ऊर्जा और रणनीतिक खनिज सहयोग की दिशा में तेजी से विकसित हो रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों का महत्व बढ़ने के कारण यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकती है।
भारत के लिए अर्जेंटीना लिथियम, तांबा, तेल और गैस का वैकल्पिक तथा भरोसेमंद स्रोत बन सकता है, जबकि अर्जेंटीना के लिए भारत एक विशाल और दीर्घकालिक बाजार उपलब्ध कराता है।
यदि दोनों देश खनन, ऊर्जा, बैटरी निर्माण, निवेश और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में ठोस परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हैं, तो भारत-अर्जेंटीना संबंध वैश्विक ऊर्जा संक्रमण और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी का रूप ले सकते हैं।