अत्यधिक मोबाइल उपयोग से बढ़ रहा ‘टेक नेक’ का खतरा

लगातार झुककर स्क्रीन देखने से गर्दन, कंधों, कलाई और आंखों पर बढ़ता है दबाव

 

स्मार्टफोन जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, लेकिन घंटों तक गर्दन झुकाकर स्क्रीन देखने की आदत शरीर पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। चिकित्सक इस स्थिति को सामान्यतः टेक नेक या टेक्स्ट नेक कहते हैं। इसमें गर्दन और कंधों में दर्द, मांसपेशियों में जकड़न, आगे झुका सिर, गोलाकार कंधे तथा हाथों में झनझनाहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

 

मोबाइल का इस्तेमाल अपने आप गर्दन को बूढ़ा नहीं बनाता, लेकिन लंबे समय तक गलत मुद्रा में रहने से पहले से मौजूद सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, डिस्क या तंत्रिका संबंधी समस्या के लक्षण उभर सकते हैं। शोध में मोबाइल इस्तेमाल की अवधि और गर्दन के दर्द की तीव्रता के बीच संबंध पाया गया है।

 

झुकने पर गर्दन पर कई गुना बढ़ता है दबाव

 

एक वयस्क व्यक्ति के सिर का औसत वजन करीब 4.5 से 6 किलोग्राम होता है। सिर सीधा रहने पर इसका भार रीढ़ आसानी से संभालती है, लेकिन आगे झुकने पर गर्दन पर पड़ने वाला यांत्रिक दबाव तेजी से बढ़ता है।

 

एक बायोमैकेनिकल मॉडल के अनुसार, सिर को लगभग 45 डिग्री झुकाने पर गर्दन पर करीब 22 किलोग्राम के बराबर बल पड़ सकता है। यह वास्तविक वजन में वृद्धि नहीं, बल्कि झुकी हुई मुद्रा के कारण उत्पन्न अनुमानित यांत्रिक दबाव है।

 

लंबे समय तक ऐसी मुद्रा में रहने से गर्दन में दर्द, मांसपेशियों का असंतुलन, कंधों का आगे झुकना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में स्थायी संरचनात्मक क्षति होना निश्चित नहीं है और उपलब्ध अध्ययनों में इसके प्रभाव की तीव्रता अलग-अलग पाई गई है।

 

कलाई, अंगूठे और छोटी उंगली पर भी असर

 

मोबाइल को लगातार एक हाथ में पकड़ने और अंगूठे से टाइप करने से कलाई एवं उंगलियों की मांसपेशियों और टेंडन पर दबाव बढ़ सकता है। इसके कारण दर्द, जकड़न, झनझनाहट और सुन्नपन महसूस हो सकता है।

 

फोन का भार छोटी उंगली पर टिकाकर रखने से उसमें असुविधा या दबाव का निशान बन सकता है। अत्यधिक टेक्स्टिंग और मोबाइल गेमिंग से अंगूठे में टेंडन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। इससे बचने के लिए फोन ग्रिप, रिंग या स्ट्रैप का उपयोग, दोनों हाथों से फोन पकड़ना, वॉयस-टू-टेक्स्ट सुविधा और बीच-बीच में हाथों को आराम देना उपयोगी हो सकता है।

 

लंबे स्क्रीन टाइम से आंखों में तनाव

 

लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन, थकान, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द हो सकता है। डिजिटल स्क्रीन सामान्य उपयोग में आंखों को स्थायी नुकसान पहुंचाती है, इसका ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है; समस्या मुख्यतः लंबे समय तक पास की वस्तु देखने, कम पलक झपकाने और अनुपयुक्त चमक से जुड़ी होती है।

 

आंखों को आराम देने के लिए 20-20-20 नियम अपनाया जा सकता हैहर 20 मिनट बाद कम से कम 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर देखें। स्क्रीन की चमक आसपास के प्रकाश के अनुरूप रखें और बार-बार पलक झपकाएं। ब्लू-लाइट फिल्टर कुछ लोगों को आराम दे सकता है, लेकिन वह अत्यधिक स्क्रीन उपयोग का समाधान नहीं है।

 

बचाव के आसान उपाय

 

  • मोबाइल को नीचे रखने के बजाय आंखों के करीब समान ऊंचाई पर पकड़ें।
  • सिर, गर्दन और रीढ़ को यथासंभव तटस्थ स्थिति में रखें।
  • कोहनियों को मेज, आर्मरेस्ट या तकिये का सहारा दें।
  • लंबे समय तक मोबाइल पर काम करने के बजाय लैपटॉप या उचित वर्कस्टेशन का इस्तेमाल करें।
  • हर 20 से 30 मिनट में छोटा ब्रेक लेकर गर्दन, कंधों, कलाई और उंगलियों को आराम दें।
  • मनोरंजन के लिए अनावश्यक स्क्रीन टाइम सीमित करें।
  • हल्की स्ट्रेचिंग और नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएं।