सीमा पर बर्बरता-सत्येन्द्र सिंह-Satendra Singh

Mar 06, 2019

सीमा पर बर्बरता

इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि अब शायद पाकिस्तान के रुख में बदलाव आएगा और वह भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने और उसे मित्रता के स्तर पर ले जाने का प्रयास करेगा। मगर अब तक पाकिस्तान की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है, जिससे कहा जा सके कि वह संबंधों में सुधार को उत्सुक है। उल्टे हर कुछ दिन में पाकिस्तान की ओर से कोई न कोई ऐसी घटना सामने आ जाती है, जिससे संबंधों में सुधार की उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। मंगलवार को पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू के नजदीक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत के सीमा सुरक्षा बल के एक जवान की जिस तरीके से हत्या कर दी, उससे साफ लग रहा है कि पाकिस्तान भारत के साथ संबंधों को सहज बनाने के बजाय उकसावे की कार्रवाई कर रहा है। यह अचानक गोलीबारी में हुई किसी जवान की मौत नहीं है। जैसी खबरें आई हैं, उनसे यही लगता है कि पाकिस्तानी सैनिकों ने सुनियोजित तरीके से घात लगा कर भारतीय जवान को निशाना बनाया, उस पर तीन गोलियां दागीं और फिर गला रेत कर उसकी मौत सुनिश्चित की। यह समझना मुश्किल है कि भारतीय जवान की हत्या करने वाले पाकिस्तानी सैनिक किस स्तर की नफरत से भरे थे या किसके आदेश से और क्यों ऐसा कर रहे थे। भारतीय सैनिकों के साथ ऐसी बर्बरता पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय जवानों को मार डाला और उनका सिर काट कर ले गए या उनके शव को क्षत-विक्षत कर डाला। जबकि इस बारे में अंतरराष्ट्रीय कानूनों में साफ कहा गया है कि मुठभेड़ या किसी भी दूसरी वजह से मारे गए व्यक्ति के शव के साथ बर्बरता अनुचित है।

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उस पर पाबंदी है। हर हाल में शवों का सम्मान किया जाना चाहिए। मगर पाकिस्तान की हरकतों से ऐसा लगता है कि न उसे किसी नैतिकता की परवाह है, न अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मानना उसे जरूरी लगता है। विडंबना यह है कि सीमा पर ऐसी हरकतों के बाद अपनी गलती स्वीकार करने और भविष्य में ऐसा न होने देने की कोशिशों के बजाय पाकिस्तान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना राग अलापने लगता है। हर कुछ दिनों बाद पाकिस्तान की ओर से कोई न कोई ऐसी कार्रवाई कर दी जाती है, जिससे न केवल सीमा पर टकराव की स्थिति बन जाती है, बल्कि इससे दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया की कोशिशें भी बाधित होती हैं। पाकिस्तान की इस तरह की हरकतें कई शक्लों में सामने आती हैं। कभी वहां के कोई राजनेता या सरकार में मंत्री ऐसा बयान दे देते हैं, जिसका मकसद ही तनाव पैदा करना होता है, तो कभी सीमा पर गोलीबारी करके भारतीय सैनिकों को उकसाने की कोशिशें की जाती हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान में स्थित ठिकानों से अपनी गतिविधियां चलाने वाले आतंकी गिरोहों की मदद करना उसका एक मुख्य शगल रहा है। यह बेवजह नहीं है कि जब भी भारत की ओर से दोनों देशों के बीच संबंधों को सहज बनाने की कोशिश होती है, इस संबंध में कूटनीतिक पहलकदमी होती है, तो वह पाकिस्तान के नकारात्मक रवैए की वजह से खटाई में पड़ जाती है। अगर पाकिस्तान सचमुच अमन चाहता है, तो उसे अपने सैनिकों की हरकतों को नियंत्रित करना ही पड़ेगा।

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