पीएफ विभाग के रिकवरी नोटिस से पूरे दिल्ली एनसीआर में उद्योगों एवं प्रतिष्ठानों में दहशत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं पर पलीता लगाने पर लगा हुआ है भविष्य निधि विभाग

Mar 04, 2019

पीएफ विभाग के रिकवरी नोटिस से पूरे दिल्ली एनसीआर में उद्योगों एवं प्रतिष्ठानों में दहशत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं पर पलीता लगाने पर लगा हुआ है भविष्य निधि विभाग

अप्रैल 2016 से जून 2017 तक का लाभ कैसे मिलेगा ?
कर्मचारियों ने जो डाटा दिया उसके आधार पर नियोक्ताओं ने उनका रजिस्ट्रेशन पीएमआरपीवाई पोर्टल पर कर दिया। नियोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की धमकी नोटिस के माध्यम से दे रहे हैं।

क्या विभाग का सॉफ्टवेयर रजिस्ट्रेशन के समय ही गलत कर्मचारी को नहीं पकड़ सकता था ?
क्या विभाग उस वक्त सो रहा था ?
आम चुनाव के समय उद्योगों एवं व्यापारियों का उत्पीड़न ?अप्रैल 2016 से जून 2017 तक का लाभ कैसे मिलेगा ?
कर्मचारियों ने जो डाटा दिया उसके आधार पर नियोक्ताओं ने उनका रजिस्ट्रेशन पीएमआरपीवाई पोर्टल पर कर दिया। नियोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की धमकी नोटिस केमाध्यम से दे रहे हैं।
क्या विभाग का सॉμटवेयर रजिस्ट्रेशन के समय ही गलत कर्मचारी कोनहीं पकड़ सकता था ?
क्या विभाग उस वक्त सो रहा था ?
आम चुनाव के समय उद्योगों एवं व्यापारियों का उत्पीड़न ?

 

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उद्योग विहार (मार्च-2019) एक ओर जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यापारियों को एवं श्रमिकों को सुविधाएँ देने के लिए नई नई योजनायें ला रहे हैं वहीं भविष्य निधि विभाग उन योजनाओं पर पलीता लगाने पर लगा हुआ है। अप्रैल 2016 में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी एक गोल्डन स्कीम पीएमआरपीवाई लाये थे जिसके तहत भविष्य निधि का नियोक्ता का 8.33 प्रतिशत हिस्सा सरकार द्वारा वहन किया जायेगा लेकिन भविष्य निधि के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस योजना की ए बी सी डी भी नहीं मालूम थी। उधर जब पी एम ओ से डण्डा चला तथा योजना की प्रगति मांगी गयी तब जुलाई 2017 से विभाग जागा, और उसने अपने कर्मचारियों को एवं नियोक्ताओं को ट्रेनिंग देने का अभियान जोर शोर से चलाया एवं इंस्पेक्टरों को प्रतिष्ठान एवं उद्योगों में भेजा जाने लगा ताकि योजना को अमली जामा पहनाया जा सके।

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फिर जब लोगों ने विभाग से पूछा की यह योजना तो अप्रैल 2016 से लागू है फिर अप्रैल 2016 से जून 2017 तक का लाभ कैसे मिलेगा तो विभाग के अधिकारियों ने कहा की उसका पैसा आपके एकाउंट में डायरेक्ट आ जायेगा लेकिन आज तक कोई पैसा नहीं आया। यह योजना सिर्फ उन नए कर्मचारियों के लिए है जिन्होंने अप्रैल 2016 में या उसके बाद नौकरी करनी शुरू की है तथा उनका यूएएन नंबर भी अप्रैल 2016 के बाद का है। जब कम्पनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती की तो कर्मचारियों ने जो डाटा दिया उसके आधार पर यदि वे कर्मचारी अप्रैल 2016 के बाद के थे तो नियोक्ताओं ने उनका रजिस्ट्रेशन पीएमआरपीवाई पोर्टल पर कर दिया। तथा उनका लाभ नियोक्ताओं को मिलने लगा। अब यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है की नियोक्ता ने तो उन कर्मचारियों का रजिस्ट्रेशन कर्मचारियों द्वारा दिए गए डाटा के आधार पर कर दिया क्योंकि उसके सामने दूसरा कोई विकल्प नहीं था की वह यह जान सके की इसका पी एफ पहले कटता था या नहीं लेकिन विभाग तो रजिस्ट्रेशन के समय ही पता कर सकता था की जिस कर्मचारी का पीएमआरपीवाई पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन हो रहा है उसका पहले का स्टेट्स क्या है। जबकि विभाग 2014 से ही पूरी तरह कम्प्यूटरीकरण का दावा कर रहा है जबकि हकीकत तो नियोक्ता जानता है या श्रमिक, जिसको परेशानी का सामना लगातार करना पड़ रहा है।

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अब विभाग ने उन कम्पनियों को रिकवरी नोटिस भेजना चालू किया है तथा नियोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की धमकी नोटिस के माध्यम से दे रहे हैं, जिनके यहाँ अप्रैल 2016 से पहले के कर्मचारियों का भी फायदा नियोक्ता को मिल रहा था जबकि नियोक्ता इस बात से अनजान था की वह कर्मचारी अप्रैल 2016 से पहले का है। सबसे बड़ी एवं सोचने वाली बात यह है की क्या विभाग उस वक्त सो रहा था ? क्या विभाग का सॉफ्टवेयर रजिस्ट्रेशन के समय ही गलत कर्मचारी को नहीं पकड़ सकता था ? या विभाग ने बिलकुल आम चुनाव के समय उद्योगों एवं व्यापारियों को परेशान करने एवं उनका उत्पीड़न करने का मन बना लिया है। इस सम्बन्ध में ‘‘लॉ ऑफ लेबर’’ एडवाइजर्स एसोसिएशन उ प्र के प्रदेश अध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह ने प्रधान मंत्री को पत्र भेज कर माँग की है की इस मामले में तुरन्त उचित कार्यवाही की जाये तथा व्यापारियों एवं उद्योगपतियों का उत्पीड़न ना किया जाये।

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