एशियाई खेल 2026: भारत के 85 पदकों में चमकी नई प्रतिभाएँ और ऐतिहासिक उपलब्धियाँ
भारत ने एशियाई खेल 2026 में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 85 पदक जीतकर अपनी खेल क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित 20वें एशियाई खेलों में भारतीय दल पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। कुल पदकों के आधार पर यह एशियाई खेलों के इतिहास में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। हांगझोऊ संस्करण के 107 पदकों से संख्या कम रहने के बावजूद कई ऐतिहासिक जीतों ने इस अभियान को विशेष बनाया।
भारतीय हॉकी के लिए यह संस्करण उल्लेखनीय सफलता लेकर आया। पुरुष टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5–1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता और पहली बार लगातार दो एशियाई खेलों में अपना खिताब बरकरार रखा। इस विजय के साथ टीम ने लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए सीधे प्रवेश भी सुनिश्चित किया। महिला हॉकी टीम ने भी स्वर्ण जीतकर 1982 के बाद पहली बार एशियाई खेलों का खिताब हासिल किया। दोनों टीमों की सफलता भारतीय हॉकी की उपलब्धियों का प्रमुख आकर्षण रही।
क्रिकेट और कबड्डी में भारत का दबदबा कायम रहा। दोनों खेलों की पुरुष और महिला टीमों ने स्वर्ण पदक जीते। पुरुष क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को फाइनल में हराकर लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का खिताब अपने नाम किया। इन चार स्वर्ण पदकों ने भारतीय अभियान को मजबूती दी और टीम स्पर्धाओं में देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को रेखांकित किया।
तीरंदाजी में भारत ने पांच स्वर्ण सहित नौ पदक हासिल किए। कुमकुम अनिल मोहोड़ ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा। वह इस स्पर्धा में एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। महिला रिकर्व टीम ने भी पहली बार स्वर्ण पदक हासिल किया और दक्षिण कोरिया का 28 वर्षों से चला आ रहा वर्चस्व समाप्त किया। कंपाउंड तीरंदाजी की महिला टीम, पुरुष टीम और मिश्रित टीम ने भी स्वर्ण जीते।
निशानेबाजी में नीरू ढांडा का प्रदर्शन खास रहा। उन्होंने महिला व्यक्तिगत ट्रैप में स्वर्ण जीतकर भारत का व्यक्तिगत ट्रैप स्वर्ण के लिए 48 वर्षों का इंतजार समाप्त किया। नीरू और काइनन चेनाई की जोड़ी ने मिश्रित टीम ट्रैप में भी स्वर्ण जीता तथा 40 में से 34 निशानों के साथ नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। भारत ने निशानेबाजी में कुल 15 पदक हासिल किए।
मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन ने महिला 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की बाओ जियी को 5–0 से हराकर स्वर्ण जीता। परवीन हुड्डा ने भी चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन को 3–2 से पराजित कर स्वर्ण पदक हासिल किया। भारतीय मुक्केबाजों ने तीन स्वर्ण सहित छह पदक जीते। कुश्ती में भी भारत को छह पदक मिले, जिनमें दो स्वर्ण शामिल रहे।
गोल्फ और भारोत्तोलन में महिला खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज कीं। प्रणवी उर्स एशियाई खेलों में व्यक्तिगत गोल्फ स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने अदिति अशोक और दीक्षा डागर के साथ महिला टीम स्पर्धा में भी पदक हासिल किया। मीराबाई चानू ने भारोत्तोलन में रजत जीतकर इस खेल में भारत का 28 वर्षों का पदक इंतजार समाप्त किया।
एथलेटिक्स से मिले 24 पदक भारतीय दल के कुल प्रदर्शन का सबसे बड़ा योगदान रहे। इन उपलब्धियों के साथ आइची-नागोया अभियान ने स्थापित खेलों में भारत की ताकत और नई स्पर्धाओं में उभरती संभावनाओं को सामने रखा। भारतीय खिलाड़ियों की ऐतिहासिक जीतें खेल प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और निरंतर सहयोग के महत्व को भी रेखांकित करती हैं।
