नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधाओं के विरोध में महिलाओं की हुंकार—रानी लक्ष्मीबाई चौक पर जन आक्रोश प्रदर्शन गाजियाबाद।

प्रेस विज्ञप्ति

गाजियाबाद

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधाओं के विरोध में महिलाओं की हुंकार—रानी लक्ष्मीबाई चौक पर जन आक्रोश प्रदर्शन
गाजियाबाद।

 

महिलाओं के सम्मान, अधिकार और राजनीतिक भागीदारी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आज गाजियाबाद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने में आ रही बाधाओं के विरोध में सैकड़ों महिलाओं ने जोरदार जन आक्रोश प्रदर्शन किया। रेलवे रोड स्थित रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा, चौधरी मोड़ पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं का उत्साह और संकल्प देखते ही बन रहा था।


कार्यक्रम संयोजक डॉ. रिचा भदोरिया एवं कार्यक्रम प्रवासी काजल त्यागी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। हाथों में तख्तियां और बुलंद नारों के साथ महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और एकजुटता का परिचय दिया।
मुख्य अतिथि का संबोधन


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व महापौर आशा शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ राजनीतिक दल इसे भी राजनीति का विषय बना रहे हैं।”

 

उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि

“जब भी महिलाओं को उनका अधिकार देने की बात आती है, ये दल भ्रम और बाधा उत्पन्न करने का काम करते हैं। आज की नारी जागरूक है और ऐसे प्रयासों का जवाब देना जानती है।”

 महिलाओं की स्पष्ट मांग


कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि


नारी शक्ति वंदन अधिनियम का शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए

 

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए


महिला सम्मान से जुड़े मुद्दों पर ठोस और स्पष्ट नीति बनाई जाए
 

एकजुटता और संकल्प का प्रदर्शन


प्रदर्शन के दौरान “नारी शक्ति का अपमान नहीं सहेंगे”, “अधिकार हमारा—संघर्ष हमारा” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। युवतियों से लेकर वरिष्ठ महिलाओं तक की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब महिला शक्ति किसी भी प्रकार की उपेक्षा या राजनीतिक बाधा को स्वीकार नहीं करेगी।
निष्कर्ष


यह जन आक्रोश प्रदर्शन केवल विरोध नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति एक सशक्त चेतना और जागरूकता का प्रतीक बनकर उभरा।

 

महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया कि
अब सम्मान भी मिलेगा, अधिकार भी मिलेगा—और आवश्यकता पड़ी तो संघर्ष भी होगा।

 

सादर,
मीडिया विभाग
मीडिया प्रभारी: नीरज शर्मा
सह-प्रभारी: करण शर्मा