बिना अवकाश स्वीकृत कराए लंबे समय तक अनुपस्थित रहना गंभीर दुराचरण, सेवा समाप्ति भी हो सकती है उचित

कर्मचारी द्वारा बिना स्वीकृत अवकाश के लंबे समय तक कार्यस्थल से अनुपस्थित रहना केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि गंभीर दुराचरण माना जा सकता है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में लगभग चार महीने तक अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी की सेवा समाप्ति को उचित ठहराते हुए स्पष्ट किया कि नियमित उपस्थिति रोजगार संबंध का मूलभूत दायित्व है।

 

मामला एक कर्मचारी से जुड़ा था, जो वर्ष 1992 में बैंगलोर मोटर ट्रांसपोर्ट कंपनी में परिचालक के रूप में नियुक्त हुआ था। वह 30 सितंबर 2014 से 24 दिसंबर 2014 तक लगभग चार महीने बिना किसी स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से अनुपस्थित रहा।

 

कर्मचारी ने न तो नियमानुसार अवकाश स्वीकृत कराया और न ही अनुपस्थिति के संबंध में संतोषजनक सूचना अथवा अनुमति प्रस्तुत की। इस स्थिति को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए नियोक्ता ने विभागीय प्रक्रिया के बाद उसकी सेवा समाप्त कर दी।

 

पहले श्रम न्यायालय में मिली राहत
सेवा समाप्ति के खिलाफ कर्मचारी ने श्रम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। श्रम न्यायालय ने कर्मचारी के पक्ष में निर्णय देते हुए उसे बहाल करने और संबंधित लाभ देने का आदेश दिया।

 

नियोक्ता ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों, अनुपस्थिति की अवधि और कर्मचारी के आचरण का परीक्षण करते हुए श्रम न्यायालय के निर्णय को पलट दिया।

 

उच्च न्यायालय ने मानी सेवा समाप्ति उचित
न्यायालय ने कहा कि कर्मचारी को अवकाश लेना उसका स्वतःसिद्ध अधिकार नहीं माना जा सकता। किसी भी कर्मचारी के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अवकाश हेतु आवेदन करना और उसकी स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक है।

 

न्यायालय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि लंबे समय तक बिना स्वीकृति अनुपस्थित रहना नियोक्ता के अनुशासन और कार्य व्यवस्था को प्रभावित करता है। ऐसे मामलों में सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई भी परिस्थितियों के आधार पर उचित हो सकती है।

 

न्यायालय ने यह भी माना कि यदि कर्मचारी बार-बार या लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहता है, तो यह केवल साधारण अनुपस्थिति नहीं बल्कि सेवा अनुशासन का गंभीर उल्लंघन हो सकता है।

 

अवकाश आवेदन और स्वीकृति में है स्पष्ट अंतर
निर्णय का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि केवल अवकाश के लिए आवेदन कर देना पर्याप्त नहीं है। जब तक सक्षम प्राधिकारी से अवकाश स्वीकृत न हो, कर्मचारी अपनी अनुपस्थिति को अधिकृत नहीं मान सकता।

 

अर्थात कर्मचारी की जिम्मेदारी केवल आवेदन प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है; उसे यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि अवकाश औपचारिक रूप से स्वीकृत हो चुका है।