युवा भारत के सामने ‘साइलेंट’ हेल्थ अलार्म: 87% वयस्कों में असामान्य कोलेस्ट्रॉल का संकेत

भारत में हृदय स्वास्थ्य को लेकर सामने आए आंकड़े गंभीर चिंता पैदा कर रहे हैं। ICMR-INDIAB अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, अध्ययन में शामिल भारतीय वयस्कों में करीब 87.3 प्रतिशत में लिपिड प्रोफाइल से जुड़ी कम-से-कम एक असामान्यता पाई गई। चिंता की बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी हो सकती है, जो बाहर से पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देते हैं और जिन्हें अपनी स्थिति का अंदाजा तक नहीं होता।

 

देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 23,665 वयस्कों पर किए गए अध्ययन में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड से संबंधित कई महत्वपूर्ण संकेत सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 66.8 प्रतिशत लोगों में HDL यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्या दर्ज की गई। वहीं 49.4 प्रतिशत में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया गया। करीब 29.5 प्रतिशत लोगों में ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ा हुआ था, जबकि लगभग 22.1 प्रतिशत में कुल कोलेस्ट्रॉल अधिक पाया गया।

 

यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि असामान्य लिपिड स्तर लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकता है। LDL का स्तर बढ़ने पर धमनियों में वसा जमा होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। समय के साथ यह धमनियों को संकरा कर हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हो सकता है।

 

विशेषज्ञ बदलती जीवनशैली को इस चुनौती से जोड़कर देखते हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी, अधिक कैलोरी वाला भोजन, संतृप्त वसा और ट्रांस फैट का ज्यादा सेवन, बढ़ता वजन तथा लंबे समय तक बैठे रहने की आदतें लिपिड असंतुलन से जुड़ी हो सकती हैं। भारतीय भोजन में कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा भी कुछ लोगों में ट्राइग्लिसराइड बढ़ने से संबंधित हो सकती है।

 

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण संकेत युवा आबादी को लेकर भी है। रिपोर्ट में 30 से 39 वर्ष के आयु वर्ग में डिस्लिपिडेमिया का औसत स्तर उल्लेखनीय बताया गया है। इससे यह धारणा कमजोर होती है कि कोलेस्ट्रॉल केवल अधिक उम्र के लोगों की समस्या है। आधुनिक जीवनशैली के कारण कम उम्र में भी जोखिम कारक विकसित हो सकते हैं।

 

इस स्थिति से निपटने के लिए केवल दवाओं पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार लिपिड प्रोफाइल की निगरानी महत्वपूर्ण है।

 

भारत जब एक युवा और उत्पादक अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है, तब वर्कफोर्स की सेहत भी आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। असामान्य कोलेस्ट्रॉल का इतना व्यापक स्तर केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि कॉरपोरेट हेल्थ, उत्पादकता और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के लिए भी एक चेतावनी है।

 

समय रहते जांच और जीवनशैली में सुधार ही इस साइलेंट रिस्क को बड़े स्वास्थ्य संकट में बदलने से रोकने की सबसे प्रभावी शुरुआत हो सकती है।