यूपीआई के 96% भुगतान एमडीआर से बाहर, ₹2,000 से अधिक के कारोबारी लेनदेन पर 0.4% शुल्क का प्रावधान

डिजिटल भुगतान व्यवस्था में प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई के अधिकांश लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार, यूपीआई से होने वाले लगभग 96 प्रतिशत लेनदेन एमडीआर के दायरे से बाहर रहेंगे।

 

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक के यूपीआई कारोबारी लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत एमडीआर लिया जाएगा। यह शुल्क उपभोक्ता से नहीं, बल्कि भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी से वसूला जाएगा। एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले व्यापारी भुगतान सेवा प्रदाता या बैंक को देता है।

 

सरकार का कहना है कि यदि कोई उपभोक्ता किसी कारोबारी को यूपीआई के माध्यम से ₹2,000 से अधिक का भुगतान करता है, तो उसे स्वयं कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। शुल्क की जिम्मेदारी कारोबारी की होगी और इसे ग्राहकों पर सीधे डालने की अनुमति नहीं होगी।

 

छोटे कारोबारियों के अधिकांश लेनदेन रहेंगे शुल्क-मुक्त
सरकार के अनुसार, बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और छोटे कारोबारी कम मूल्य के यूपीआई भुगतान स्वीकार करते हैं। ऐसे में ₹2,000 तक के लेनदेन शुल्क-मुक्त रहने से उनके अधिकांश डिजिटल भुगतान एमडीआर के दायरे से बाहर रहेंगे।

 

सरकार का तर्क है कि यह व्यवस्था कारोबारियों को नकद लेनदेन के बजाय डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित करेगी और साथ ही यूपीआई प्रणाली की सुरक्षा तथा तकनीकी ढांचे को मजबूत करने में मदद करेगी।

 

एमडीआर पर 18% जीएसटी भी लागू
एमडीआर शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लागू होगा। हालांकि पात्र कारोबारी इस जीएसटी को इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में समायोजित कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावहारिक रूप से कुछ कारोबारी इस अतिरिक्त लागत को कीमतों या अन्य शुल्क के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं।

 

यूपीआई लेनदेन की तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए एमडीआर व्यवस्था से बड़े स्तर पर राजस्व जुटने की संभावना भी जताई गई है। यूपीआई के माध्यम से हर महीने बड़ी मात्रा में डिजिटल भुगतान किए जा रहे हैं, जिससे भुगतान प्रणाली के संचालन, साइबर सुरक्षा और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खर्च बढ़ रहा है।

 

साइबर सुरक्षा और डिजिटल ढांचे को मजबूत करने का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को लगातार निवेश करना पड़ता है। प्रस्तावित एमडीआर से प्राप्त संसाधनों का उपयोग यूपीआई नेटवर्क की क्षमता, साइबर सुरक्षा और तकनीकी स्थिरता बढ़ाने में किया जा सकता है।

 

हालांकि प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ कानूनी चुनौती भी सामने आई है। ₹2,000 से अधिक के यूपीआई व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन पर एमडीआर लगाने के निर्णय को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है, जिसमें शुल्क की वैधता और इसके उपभोक्ता प्रभाव पर सवाल उठाए गए हैं।

 

डिजिटल भुगतान के व्यापक प्रसार के बीच सरकार की चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि यूपीआई आम उपभोक्ता और छोटे व्यापारी के लिए सस्ता और सरल बना रहे, जबकि इसके संचालन और सुरक्षा के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन भी उपलब्ध होते रहें।