अडाणी एयरपोर्ट्स बनी दुनिया की तीसरी सबसे मूल्यवान एयरपोर्ट कंपनी
अडाणी एयरपोर्ट्स ने वैश्विक विमानन अवसंरचना क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया की तीसरी सबसे मूल्यवान एयरपोर्ट कंपनी के रूप में स्थान बनाया है। वैश्विक और घरेलू निवेशकों से एक अरब डॉलर की पूंजी जुटाने के बाद कंपनी की वैल्यूएशन बढ़कर लगभग 19 अरब डॉलर हो गई है।
इस निवेश दौर में वैश्विक निवेशकों और प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने भागीदारी की। कंपनी की बढ़ी हुई वैल्यूएशन भारत के विमानन क्षेत्र में निजी निवेश, एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्री यातायात की संभावनाओं के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
आठ एयरपोर्ट्स का संचालन
अडाणी एयरपोर्ट्स वर्तमान में देश के आठ एयरपोर्ट्स का संचालन करती है, जिनमें मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शामिल है। कंपनी भारत के कुल यात्री यातायात का लगभग एक-चौथाई हिस्सा और एयर कार्गो का लगभग एक-तिहाई हिस्सा संभालती है।
एयरपोर्ट्स की संख्या के लिहाज से कंपनी भारत की सबसे बड़ी एयरपोर्ट ऑपरेटर बन चुकी है। हालांकि यात्री संख्या के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र की एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया अभी भी बड़ी भूमिका निभाती है।
वैश्विक कंपनियों के मुकाबले मजबूत स्थिति
कंपनी की लगभग 19 अरब डॉलर की वैल्यूएशन ने इसे स्पेन की Aena और थाईलैंड की Airports of Thailand जैसी प्रमुख वैश्विक एयरपोर्ट कंपनियों के करीब ला दिया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, Aena का बाजार पूंजीकरण लगभग 46 अरब डॉलर और Airports of Thailand की वैल्यूएशन करीब 27 अरब डॉलर है। वहीं भारत की GMR Airports का मार्केट कैप लगभग 10.9 अरब डॉलर बताया गया है।
भारतीय विमानन क्षेत्र में बढ़ते निवेश का संकेत
अडाणी एयरपोर्ट्स की बढ़ी हुई वैल्यूएशन भारतीय विमानन बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं का संकेत देती है। तेजी से बढ़ते हवाई यात्री यातायात, नए एयरपोर्ट्स, शहरी विस्तार और एयर कार्गो की बढ़ती जरूरतों ने इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है।
भारत में विमानन अवसंरचना का विस्तार केवल एयरपोर्ट संचालन तक सीमित नहीं है। इसके साथ रिटेल, लॉजिस्टिक्स, कार्गो, हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी नए व्यावसायिक अवसर विकसित हो रहे हैं।
एक अरब डॉलर की नई पूंजी और 19 अरब डॉलर की वैल्यूएशन के साथ अडाणी एयरपोर्ट्स की यह उपलब्धि भारतीय निजी क्षेत्र की वैश्विक विमानन अवसंरचना बाजार में बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित करती है।
