परमाणु ऊर्जा विस्तार से बढ़ेगी यूरेनियम की मांग, घरेलू उत्पादन अब भी जरूरत से काफी कम

भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में प्रस्तावित विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में यूरेनियम की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है। संसदीय समिति के एक आकलन के अनुसार, देश के प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टरों (PHWRs) के संचालन के लिए प्रतिवर्ष लगभग 5,400 टन यूरेनियम ऑक्साइड की आवश्यकता पड़ सकती है, जबकि घरेलू उत्पादन अभी इस जरूरत का करीब 30 प्रतिशत ही पूरा कर पा रहा है।यह स्थिति ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि परमाणु ऊर्जा को भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यदि परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ती है, तो ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होगा।

 

घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर
संसदीय समिति ने यूरेनियम उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में आपूर्ति जोखिम और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकती है।
यूरेनियम खनन, प्रसंस्करण और घरेलू संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से स्थानीय उत्पादन बढ़ाना इसलिए आवश्यक माना जा रहा है, ताकि परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को स्थिर ईंधन आपूर्ति मिल सके।

 

कजाखस्तान, रूस, उज्बेकिस्तान और कनाडा से आयात
भारत वर्तमान में यूरेनियम की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में कजाखस्तान, रूस, उज्बेकिस्तान और कनाडा शामिल हैं।
इन देशों से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। हालांकि, वैश्विक बाजार में कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों को देखते हुए घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाना रणनीतिक दृष्टि से जरूरी माना जा रहा है।

 

यूरेनियम भंडार की खोज में भी तेजी
देश में यूरेनियम संसाधनों की खोज को भी विस्तार दिया जा रहा है। संबंधित अन्वेषण एजेंसियों ने विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर यूरेनियम ऑक्साइड संसाधनों की पहचान की है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 4.31 लाख टन यूरेनियम ऑक्साइड संसाधनों की पहचान की जा चुकी है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के पास घरेलू स्तर पर संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन खनन, पर्यावरणीय मंजूरी, परियोजना विकास और प्रसंस्करण क्षमता को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है।

 

यूरेनियम कॉरपोरेशन और परमाणु ऊर्जा संस्थानों की भूमिका अहम
घरेलू यूरेनियम उत्पादन बढ़ाने में यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं परमाणु ऊर्जा उत्पादन और ईंधन आवश्यकता के बीच समन्वय के लिए न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) जैसे संस्थानों की भागीदारी भी जरूरी है।
संसदीय समिति ने ऐसी संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है, जिनके माध्यम से भविष्य की मांग का बेहतर अनुमान, खनन परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति और आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

 

आयात निर्भरता से जुड़े जोखिम
यूरेनियम जैसे रणनीतिक खनिजों के मामले में आयात पर अधिक निर्भरता कई प्रकार के जोखिम पैदा करती है। वैश्विक मूल्य वृद्धि, परिवहन बाधाएं, भू-राजनीतिक तनाव या निर्यात नीतियों में बदलाव परमाणु ईंधन की उपलब्धता को प्रभावित कर सकते हैं।
यही कारण है कि ऊर्जा सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण में यूरेनियम की घरेलू उपलब्धता को केवल खनन का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीतिक आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है।

 

परमाणु ऊर्जा विस्तार के साथ बढ़ेगी चुनौती
भारत यदि आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा की स्थापित क्षमता को तेजी से बढ़ाता है, तो ईंधन की मांग भी उसी अनुपात में बढ़ेगी। इससे खनन, प्रसंस्करण, भंडारण और ईंधन आपूर्ति की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता होगी।