उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तीन से चार चरणों में कराने की तैयारी, निर्वाचन आयोग ने बढ़ाई सक्रियता
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। संकेत हैं कि राज्य में मतदान प्रक्रिया तीन से चार चरणों में कराई जा सकती है। इससे पहले 2022, 2017 और 2012 के विधानसभा चुनाव सात चरणों में संपन्न हुए थे।
निर्वाचन आयोग हाल के चुनावों में कम चरणों में सफलतापूर्वक मतदान कराने के अनुभव के आधार पर उत्तर प्रदेश में भी चरणों की संख्या घटाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में सीमित चरणों में चुनाव कराने के बाद आयोग ने अपनी प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी क्षमता को और मजबूत किया है।
उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में मतदान एक चरण में कराने की तैयारी है, जबकि मणिपुर में सुरक्षा और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए दो चरणों में चुनाव कराए जाने की संभावना है।
लंबे चुनाव कार्यक्रम को छोटा करने पर जोर
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में चुनाव के दौरान लंबा कार्यक्रम प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दलों—सभी के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है। कई चरणों में चुनाव होने से आदर्श आचार संहिता की अवधि भी लंबी हो जाती है। ऐसे में आयोग कम चरणों में सुरक्षित, पारदर्शी और सुचारु मतदान कराने के विकल्पों का परीक्षण कर रहा है।
चुनाव आयोग की ओर से मतदान केंद्रों, सुरक्षाबलों की उपलब्धता, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों, संवेदनशील क्षेत्रों और प्रशासनिक संसाधनों का आकलन महत्वपूर्ण रहेगा। सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी निष्पक्षता से समझौता किए बिना चरणों की संख्या कम करना आयोग की प्राथमिक चुनौती होगी।
राज्यों का दौरा करेंगी निर्वाचन आयोग की टीमें
चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए निर्वाचन आयोग की टीमें संबंधित राज्यों का दौरा करेंगी। इस प्रक्रिया में विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदान केंद्रों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी संसाधनों की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर सहित चुनावी राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पंजाब और उत्तराखंड में भी अंतिम मतदाता सूची निर्धारित समयसीमा के अनुरूप प्रकाशित किए जाने की तैयारी है।
मई 2027 तक पूरा होना है उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। वहीं मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 13 मार्च, गोवा का 14 मार्च, पंजाब का 16 मार्च और उत्तराखंड का 28 मार्च 2027 तक निर्धारित है। इसी संवैधानिक समयसीमा को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देगा।
यदि उत्तर प्रदेश में मतदान तीन या चार चरणों में कराया जाता है, तो यह राज्य की चुनावी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। कम चरणों वाला चुनाव न केवल प्रशासनिक प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकता है, बल्कि राजनीतिक गतिविधियों और आचार संहिता की अवधि को भी सीमित करने में सहायक हो सकता है।
