आम की गुठलियों से तैयार होंगे बटर और तेल, किसानों एवं उद्योगों के लिए खुलेंगे नए अवसर
आम खाने के बाद सामान्यतः बेकार समझकर फेंक दी जाने वाली गुठलियां अब मूल्यवान औद्योगिक उत्पादों का स्रोत बन सकती हैं। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिकों ने आम की गुठलियों और छिलकों से खाद्य बटर, तेल, हाइड्रोजेल तथा अन्य उपयोगी सामग्री तैयार करने की तकनीक विकसित की है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, सूखी गुठलियों से तैयार सीड बटर एक वसा आधारित उत्पाद है, जिसमें ओलिक और स्टीयरिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसका उपयोग खाद्य पदार्थों के साथ कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण में भी किया जा सकता है। गुठलियों में लगभग 65 प्रतिशत तक स्टार्च मिलने की संभावना के कारण इसे औद्योगिक कच्चे माल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
शोधकर्ताओं ने आम की गुठलियों से हाइड्रोजेल भी तैयार किया है, जिसका उपयोग मिट्टी में नमी बनाए रखने, सिंचाई जल की आवश्यकता कम करने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं में किया जा सकता है। वहीं, आम के छिलकों से ग्रीन सिंथेसिस तकनीक के माध्यम से कार्बन क्वांटम डॉट्स और नैनोमटेरियल विकसित किए गए हैं।
गुठलियों से तैयार बटर और तेल में पॉलीफेनॉल, विटामिन-ई, आवश्यक खनिज और आहार फाइबर जैसे पोषक तत्व मिलने की संभावना है। इन उत्पादों को लगभग दो वर्ष तक सुरक्षित रखने का दावा किया गया है। यह नवाचार आम उत्पादकों के लिए अतिरिक्त आय, प्रसंस्करण उद्योग के लिए नया कच्चा माल और कृषि अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन का मार्ग खोल सकता है।
