मजबूत आर्थिक संकेतकों से भारत की विकास गति तेज

वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक संकटों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती के संकेत दिए हैं। मजबूत घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश, स्थिर राजस्व संग्रह और विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों के विस्तार से आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बनी हुई है।

 

सरकारी आर्थिक संकेतकों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.7 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की। इसके साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहा। वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह सात प्रतिशत थी।

 

इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का विस्तार, उपभोग में सुधार, बढ़ता पूंजी निवेश तथा मजबूत घरेलू मांग शामिल हैं।

 

जीएसटी और कर संग्रह में तेजी

 

जून 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 13.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। रिफंड समायोजन के बाद शुद्ध जीएसटी राजस्व में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

 

प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी सकारात्मक रुझान बना रहा। जून के मध्य तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। -वे बिल जारी होने में 10.9 प्रतिशत की वृद्धि वस्तुओं की आवाजाही और कारोबारी गतिविधियों में विस्तार का संकेत देती है।

 

बुनियादी ढांचे पर बढ़ा निवेश

 

सार्वजनिक पूंजीगत व्यय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण विकास इंजन बना हुआ है। अप्रैल और मई के दौरान सरकार का पूंजीगत व्यय बढ़कर 2.51 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 29,650 करोड़ रुपये अधिक है।

 

भारतीय रेलवे ने भी बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण परियोजनाओं पर 84,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं पर बढ़ा निवेश निर्माण गतिविधियों, रोजगार और निजी निवेश को प्रोत्साहित कर सकता है।

 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती

 

उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों में भी सुधार दिखाई दिया है। बिजली की मांग में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है। माल ढुलाई और नए औद्योगिक ऑर्डर में भी वृद्धि दर्ज की गई।

 

ट्रैक्टरों की मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों की बिक्री में 7.8 प्रतिशत वृद्धि हुई। ये संकेत ग्रामीण आय, कृषि गतिविधियों और उपभोक्ता मांग में सुधार को दर्शाते हैं।

 

राजकोषीय अनुशासन पर भरोसा

 

कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में नरमी से सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने में सहायता मिल सकती है। मजबूत कर संग्रह और पूंजीगत व्यय के संतुलन से विकास एवं राजकोषीय अनुशासन दोनों को बनाए रखने की उम्मीद है।

 

जीडीपी वृद्धि, कर संग्रह, बुनियादी ढांचा निवेश और ग्रामीण मांग के सकारात्मक संकेत बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है। इस गति को बनाए रखने के लिए रोजगार सृजन, निजी निवेश, निर्यात और विनिर्माण प्रतिस्पर्धा पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक होगा।