स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ शीर्ष पर, इंदौर और जबलपुर भी अग्रणी शहरों में शामिल
देश के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयासों का आकलन करने वाले स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में लखनऊ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए बड़े शहरों की श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ पहले स्थान पर रहा, जबकि इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा।
यह सर्वेक्षण केवल मौजूदा वायु गुणवत्ता को नहीं, बल्कि शहरों द्वारा प्रदूषण कम करने के लिए उठाए गए ठोस कदमों, नीतिगत उपायों, निगरानी व्यवस्था और पर्यावरणीय सुधारों को भी ध्यान में रखता है। इसी आधार पर देशभर के शहरों की रैंकिंग तैयार की गई।
लखनऊ ने कचरा प्रबंधन, सड़कों की सफाई, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निगरानी जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया। शहर में कचरा उठान व्यवस्था, मैकेनिकल एवं वैक्यूम स्वीपिंग और हरित पट्टियों के विकास को भी रैंकिंग में महत्वपूर्ण माना गया।
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में कड़ा मुकाबला
बड़े शहरों की श्रेणी में लखनऊ के बाद इंदौर और जबलपुर का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। भोपाल, आगरा, सूरत, रायपुर, ठाणे, चंडीगढ़, राजकोट, अहमदाबाद, विजयवाड़ा, गाजियाबाद, नवी मुंबई और नागपुर जैसे शहर भी शीर्ष समूह में शामिल रहे।
इंदौर की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई, जबकि जबलपुर ने भी अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। इससे स्पष्ट है कि मध्य भारत के कई शहर वायु प्रदूषण नियंत्रण और शहरी पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार निवेश और सुधार कर रहे हैं।
छोटे और मध्यम शहरों में भी बढ़ी प्रतिस्पर्धा
सर्वेक्षण में शहरों को उनकी आबादी के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया। 3 से 10 लाख और 3 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए भी पृथक रैंकिंग तैयार की गई।
मध्यम आकार के शहरों में अमरावती, झांसी और अन्य नगरों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि छोटी आबादी वाले शहरों में भी प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि स्वच्छ वायु से जुड़ी नीतियां अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं।
]
पीएम10 स्तर में कई शहरों ने दर्ज किया सुधार
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत शामिल कई शहरों में पीएम10 प्रदूषण स्तर में कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आकलन के अनुसार, बड़ी संख्या में शहरों ने 2017-18 की तुलना में 2025-26 तक पीएम10 स्तर में सुधार दिखाया है।
करीब 130 शहरों में से 108 शहरों में पीएम10 के स्तर में सुधार दर्ज किया गया, जबकि 72 शहरों ने 20 प्रतिशत से अधिक की कमी हासिल की। इनमें से 26 शहरों में प्रदूषण स्तर में 40 प्रतिशत से अधिक सुधार दर्ज किया गया। कुछ शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप स्तर तक पहुंचने में भी सफल रहे।
शहरों की रैंकिंग किन मानकों पर होती है
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में कई व्यावहारिक मानकों को शामिल किया जाता है। इनमें कचरा जलाने पर रोक, सड़क की धूल कम करने के उपाय, निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले धूलकणों का नियंत्रण, औद्योगिक प्रदूषण की रोकथाम, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी और पीएम10 जैसे प्रदूषकों के स्तर में सुधार प्रमुख हैं।
शहरों द्वारा किए गए हरित उपायों, सार्वजनिक परिवहन में सुधार, ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने और प्रदूषण निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे कदम भी इस मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को आर्थिक प्रोत्साहन
वायु गुणवत्ता सुधार में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शहरों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार राशि की व्यवस्था भी की गई है। बड़े शहरों की श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले शहर को अधिक राशि प्रदान की जाती है, जबकि दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले शहरों को भी वित्तीय पुरस्कार दिए जाते हैं।
इस तरह का प्रोत्साहन नगर निकायों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर तकनीक, हरित अवसंरचना, सफाई व्यवस्था और सतत शहरी विकास योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
स्वच्छ हवा अब शहरी विकास का प्रमुख पैमाना
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का बढ़ता महत्व यह दर्शाता है कि शहरों की प्रगति अब केवल सड़क, भवन और आर्थिक विकास से नहीं आंकी जा सकती। नागरिकों के लिए स्वस्थ वातावरण, कम प्रदूषण और बेहतर जीवन गुणवत्ता भी शहरी प्रतिस्पर्धा के महत्वपूर्ण मानदंड बन चुके हैं।
लखनऊ, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों का बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि योजनाबद्ध प्रबंधन, तकनीक, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और नागरिक भागीदारी के माध्यम से वायु प्रदूषण जैसी जटिल समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
