उत्थान वाटिका में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट और भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए उत्थान समिति ने जल संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्थान वाटिका में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वर्षा के पानी को व्यर्थ बहने से रोककर उसे भूजल पुनर्भरण में उपयोग करना और आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
इस पहल के शुभारंभ अवसर पर विधायक अजीत पाल त्यागी और भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और संस्था के सदस्यों ने जल संरक्षण को व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने का संकल्प लिया।
जल संरक्षण केवल सामाजिक दायित्व नहीं, प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी : सतेंद्र सिंह
उत्थान समिति के चेयरमैन सतेंद्र सिंह ने कहा कि भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार, प्रशासन या सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का व्यक्तिगत दायित्व भी है। प्रकृति द्वारा मिलने वाला वर्षा जल एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है और वैज्ञानिक तरीके से इसका संचयन कर भूजल स्तर को बेहतर बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया जा सकता है।
सतेंद्र सिंह ने कहा कि वर्षा जल संचयन को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। आवासीय परिसरों, पार्कों, विद्यालयों, औद्योगिक इकाइयों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर अधिक से अधिक रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियां विकसित की जानी चाहिए।
उन्होंने नगर निगम एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्थान समिति पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में अपने प्रयासों को लगातार आगे बढ़ाती रहेगी।
हर घर और हर संस्था में विकसित हो वर्षा जल संचयन व्यवस्था : अजीत पाल त्यागी
विधायक अजीत पाल त्यागी ने उत्थान समिति की पहल की सराहना करते हुए कहा कि जल संकट से निपटने के लिए केवल बड़े सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना जल संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करना कठिन है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक घर, संस्था और प्रतिष्ठान को वर्षा जल संरक्षण की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। छोटे-छोटे स्थानीय प्रयास यदि व्यापक स्तर पर किए जाएं तो भूजल पुनर्भरण में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
उन्होंने उत्थान समिति की पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से जल संरक्षण अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा : मयंक गोयल
भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने कहा कि पर्यावरण और जल संरक्षण सीधे समाज के भविष्य से जुड़े विषय हैं। विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी प्राथमिकता में होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जल जीवन का आधार है और इसकी उपलब्धता को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना भी वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही जल संरक्षण को वास्तविक आंदोलन बनाया जा सकता है। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं, स्थानीय प्रशासन, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, आरडब्ल्यूए और नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा।
वर्षा जल को जमीन में वापस पहुंचाने पर जोर
वर्षा जल संचयन व्यवस्था का मूल उद्देश्य बारिश के दौरान बहकर नालियों और सीवर में चले जाने वाले पानी को संरक्षित कर उसे जमीन के भीतर पहुंचाना है। इससे प्राकृतिक रूप से भूजल पुनर्भरण में सहायता मिलती है।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट क्षेत्र के विस्तार और खुले भूभाग में कमी के कारण वर्षा जल का बड़ा हिस्सा जमीन में समाहित होने के बजाय सतही बहाव के रूप में निकल जाता है। ऐसी परिस्थितियों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग शहरी क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
उत्थान समिति का प्रयास इसी सोच पर आधारित है कि वर्षा की प्रत्येक उपयोगी बूंद को जमीन में वापस पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाए।
पार्क, संस्थान और औद्योगिक इकाइयां बन सकती हैं जल संरक्षण की बड़ी साझेदार
जल संरक्षण की दिशा में सार्वजनिक पार्क, शिक्षण संस्थान, आवासीय सोसायटियां और औद्योगिक इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन परिसरों में बड़ी छतें और खुले क्षेत्र उपलब्ध होते हैं, जिनसे वर्षा जल को व्यवस्थित रूप से एकत्र कर रिचार्ज पिट या अन्य संचयन प्रणालियों तक पहुंचाया जा सकता है।
यदि शहरी क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्थाओं को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए तो भूजल पर बढ़ते दबाव को कुछ हद तक कम करने के साथ जल प्रबंधन की दीर्घकालिक व्यवस्था मजबूत की जा सकती है।
युवाओं को जल संरक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर
उत्थान समिति ने युवाओं से भी जल संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। संस्था का मानना है कि पर्यावरणीय चुनौतियों का स्थायी समाधान तभी संभव है जब नई पीढ़ी को केवल जागरूक ही नहीं बल्कि समाधान प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाया जाए।
विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक मंचों के माध्यम से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता विकसित की जा सकती है।
सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित होगा जल भविष्य
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण केवल एक अभियान या एक परियोजना तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए निरंतर व्यवहार परिवर्तन, जनभागीदारी और स्थानीय स्तर पर प्रभावी जल प्रबंधन आवश्यक है।
उत्थान वाटिका में स्थापित वर्षा जल संचयन व्यवस्था इस दिशा में एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है कि स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे लेकिन योजनाबद्ध प्रयास भी जल संरक्षण की बड़ी मुहिम का आधार बन सकते हैं।
कार्यक्रम में उत्थान समिति के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने “वर्षा की हर बूंद अनमोल है—इसे बहने नहीं, धरती में सहेजने की जरूरत है” के संदेश के साथ जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
