नई पारी

Jun 03, 2019

नई पारी

भारी बहुमत से चुनाव जीत कर दुबारा सत्ता की कमान संभालने वाली भाजपा और सहयोगी दलों की सरकार के मंत्रियों पर स्वाभाविक ही लोगों की नजर थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य समारोह में अपने पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनकी सरकार में ज्यादातर पुराने मंत्रियों को शामिल किया गया है। कुछ नए मंत्रियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्रियों का चुनाव करते समय क्षेत्र, वर्ग आदि के साथसाथ सहयोगी दलों का भी ध्यान रखा गया है। इस तरह मंत्रियों के चुनाव से उम्मीद जगी है कि सरकार इस बार भी तमाम क्षेत्रों में कामकाज सुचारु ढंग से चलाने को लेकर प्रतिबद्ध है। आमतौर पर मंत्रिमंडल का गठन करते समय दलों, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और करीबी लोगों का दबाव देखा जाता है, मगर नई सरकार के मंत्रिमंडल में यह दबाव नजर नहीं आता। चूंकि सरकार के कामकाज की जवाबदेही आखिरकार सत्ता के मुखिया पर आती है, इसलिए उसका दायित्व होता है कि वह ऐसे लोगों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे, जो कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार हों और सरकार के दृष्टिकोण तथा लक्ष्यों के अनुरूप काम कर सकें। फिर जब कोई सरकार अपनी दूसरी पारी शुरू करती है, तो पुराने सहयोगियों के कामकाज का भी मूल्यांकन करती है। अगर वह किसी मंत्री के कामकाज से संतुष्ट नहीं होती, तो उसे दुबारा जिम्मेदारी न सौंपने जैसे कठोर फैसले भी करने पड़ते हैं। इस तरह नई सरकार अपने मंत्रिमंडल के गठन में अधिक व्यावहारिक नजर आई है।

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कई बार सरकारें दूरगामी लक्ष्य लेकर चलती हैं। कई ऐसी योजनाएं होती हैं, जिनके नतीजे एक-दो साल में नजर नहीं आते। उन पर सतत ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस तरह जब कोई पार्टी दुबारा सत्ता में आती है, तो उसे अपनी महत्त्वाकांक्षी योजनाओं पर लगातार काम करने की जरूरत होती है। अगर पिछले कार्यकाल में उनमें कोई कमी रह गई है या किसी तरह के बदलाव की जरूरत है, तो उस दिशा में काम करने की जरूरत होती है। या फिर जिन क्षेत्रों में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा पाया होता है, उनमें नए सिरे से कार्ययोजना तैयार करनी होती है। पिछले कार्यकाल में नरेंद्र मोदी सरकार ने कृषि, वाणिज्य, स्वास्थ्य, रोजगार आदि अनेक क्षेत्रों में कई महत्त्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की थीं। उनमें से कई के अपेक्षित नतीजे अभी आने हैं। ऐसे में जिन मंत्रियों ने लक्ष्य के अनुरूप काम किए, उन्हें जिम्मेदारी सौंपना लाजमी है। इससे बड़ा फायदा यह भी होता है कि जो व्यक्ति लगातार जिस क्षेत्र में काम करता आया हो, योजनाओं को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए कटिबद्ध रहा हो, उसे उस काम के हर पहलू का ज्ञान होता है और जब उसे दुबारा जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो उसके लिए परेशानी नहीं होती। वह सहजता से उस काम को करने में जुट जाता है। इस लिहाज से कई मंत्रियों को दुबारा सरकार में शामिल किया जाना सरकार का समझदारी भरा कदम कहा जाएगा। भाजपा इस बार पिछले चुनाव से भी अधिक सीटों पर विजय हासिल कर सत्ता में आई है। इसका अर्थ है कि लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज पर भरोसा है। इस तरह नई सरकार पर जिम्मेदारियां पहले से कुछ अधिक बढ़ गई हैं। अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि क्षेत्रों की चुनौतियों से पार पाना बड़ा काम माना जा रहा है।

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